अभिवृद्धि व विकास का अर्थ एवं परिभाषा

अभिवृद्धि और विकास का अर्थ हम इस आर्टिकल में समझेंगे। अभिवृद्धि क्या है और विकास क्या होता है इसके बारे में जानेंगे।

अभिवृद्धि का अर्थ शारीरिक वृद्धि से है। जो वृद्धि कोशिकाओं की वजह से होती है। अतः अगर अभिवृद्धि को परिभाषा के रूप में कहना चाहें तो कोशिकाओं की गुणात्मक वृद्धि को ही अभिवृद्धि कहते हैं।

अभिवृद्धि की परिभाषा व अर्थ

कोशीय गुणात्मक वृद्धि ही अभिवृद्धि है। – फ्रैंक

फ्रैंक के अनुसार – शरीर एवं व्यवहार के किसी पहलू में होने वाले परिवर्तन अभिवृद्धि कहलाते हैं।

मेरिडिथ के शब्दों में – “कुछ लेखक अभिवृद्धि का प्रयोग केवल आकार की वृद्धि के अर्थ में करते हैं और विकास का प्रयोग विभेद या विशिष्टीकरण के रूप में करते हैं।”

विकास का अर्थ और परिभाषा

सम्पूर्ण आकृति या रूप में परिवर्तन ही विकास है। या यूं कहें कि विकास सम्पूर्ण अभिवृद्धियो का संगठन है। उदाहरण के लिए पैरों की वृद्धि, धड़ की वृद्धि अभिवृद्धि है किंतु इनका सम्मिलित रूप ‘शारीरिक विकास’ कहलाता है।

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हरलॉक के अनुसार –

विकास अभिवृद्धि तक ही सीमित नही है। इसकी अपेक्षा इसमें परिपक्व अवस्था के लक्ष्य की ओर, परिवर्तनों का क्रम निहित रहता है। विकास के परिणाम स्वरूप व्यक्ति में नई-नई विशेषताएं और नई-नई योग्यताएं प्रकट होती हैं।

हरलॉक

टायलर के अनुसार-

विकास एक दिशा की ओर ले जाने वाला मार्ग है।

टायलर

हरलॉक के अनुसार – विकास की अवस्था का प्रभाव दूसरी अवस्था में पड़ता है।

अभिवृद्धि और विकास का अर्थ एवं परिभाषा

तो ये थीं अभिवृद्धि और विकास की परिभाषा और अर्थ। अभिवृद्धि क्या है, विकास क्या है, ये सब हमने यहां अच्छे से समझा।

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